शिमला: हिमाचल में पंचायत चुनावों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग अब पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है. चुनावी तैयारियों की रफ्तार तय समय से पीछे चलने पर आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है. खासकर मतदाता सूची के प्रकाशन में हो रही देरी को लेकर आयोग गंभीर चिंता जता चुका है. आयोग की ओर से पहले ही जिलों को कई बार निर्देश और अवसर दिए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद तय समयसीमा का पालन नहीं हो पाया. अब राज्य निर्वाचन आयोग ने साफ संकेत दे दिए हैं कि आगे किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी.
मतदाता सूची का प्रकाशन पंचायत चुनाव की बुनियादी प्रक्रिया का अहम हिस्सा माना जाता है और इसमें लापरवाही को आयोग लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चूक मान रहा है. इसी कड़ी में जिन जिलों में अब तक मतदाता सूची प्रकाशित नहीं हो पाई है, वहां के उपायुक्तों (डीसी) को कारण बताओ नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है. आयोग का कहना है कि बार-बार चेतावनी और अवसर देने के बावजूद यदि प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी नहीं निभाई गई, तो जवाबदेही तय की जाएगी.
हिमाचल में राज्य निर्वाचन आयोग लगातार मतदाता सूचियों के प्रकाशन को लेकर अवसर दे रहा है. राज्य निर्वाचन आयोग ने पहले 28 जनवरी तक मतदाता सूचियों का प्रकाशन करने के निर्देश जारी किए थे, जिसके बाद 30 जनवरी तक प्रकाशन का मौका दिया गया. वहीं, अब 2 फरवरी तक डीसी को मतदाता सूचियों के प्रकाशन का अवसर दिया गया था, लेकिन अभी भी 10 जिलों के डीसी ने मतदाता सूचियों का प्रकाशन नहीं किया है. ऐसे में अब राज्य निर्वाचन आयोग ऐसे सभी डीसी को कारण बताओ नोटिस जारी करने की तैयारी में है.
नोटिस में दिया जाएगा हाईकोर्ट के आदेशों का भी हवाला
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार को पंचायतीराज चुनाव 30 अप्रैल से पहले पूरे करवाने के आदेश जारी किए गए हैं. हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश न्यायमूर्ति रोमेश शर्मा की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया है. जिसमें अदालत ने 28 फरवरी तक चुनाव संबंधी प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा है. इसके अलावा 30 अप्रैल तक पंचायती राज चुनाव संपन्न करवाने के भी आदेश जारी किए गए हैं. ऐसे में अगर अभी भी मतदाता सूचियों का प्रकाशन नहीं होता है तो राज्य निर्वाचन आयोग डीसी को नोटिस जारी करेगा, जिसमें प्रदेश उच्च न्यायालयों के आदेशों की पालना में हो रही देरी का भी हवाला दिया जाएगा.
