3586 पंचायतों में नियुक्त होंगे प्रशासक, प्रदेश में 31 जनवरी को पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल हो रहा समाप्त

प्रदेश की 3586 पंचायतों में जल्द ही प्रशासक नियुक्त किए जाएंगे। मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों का पांच साल का कार्यकाल 31 जनवरी को पूरा हो रहा है। पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त होते ही प्रदेश की सभी पंचायतें भंग हो जाएंगी। इसके बाद, पंचायतों में प्रशासनिक व्यवस्था प्रतिनिधि नहीं, बल्कि प्रशासक चलाएंगे। पंचायत के विकास कार्य से जुड़े फैसले प्रशासक ही लेंगे। पंचायती राज विभाग ने प्रदेश सरकार को दो प्रस्ताव भेजे हैं। पहला पंचायत सचिव को प्रशासक नियुक्त करने का है। इसके अलावा दूसरे प्रस्ताव में तीन मेंबर की कमेटी बनाने का सुझाव है। इसमें संबंधित क्षेत्र के स्कूल प्रिंसीपल या हैडमास्टर में से किसी एक को प्रशासक बनाया जाए। कमेटी में ग्राम रोजगार सेवक और पंचायत सचिव को सदस्य बनाया जाए।

अब इस पर सरकार को फैसला लेना है। प्रदेश की 3586 पंचायतों में करीब 30 हजार से अधिक जनप्रतिनिधि हैं। इनमें वार्ड सदस्य, प्रधान, उपप्रधान, पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य हैं। वार्ड सदस्य के अलावा अन्य प्रतिनिधियों के मानदेय पर सरकार हर महीने लगभग पांच करोड़ रुपए खर्च करती है, जबकि वार्ड सदस्य को केवल ग्रामसभा की मीटिंग में शामिल होने पर ही पैसा मिलता है। पंचायतों के भंग होने के बाद हर महीने पांच करोड़ की बचत होगी। पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह के पास विभाग के प्रस्ताव की फाइल पहुंच गई है। मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद इस पर जल्द ही आने वाले दिनों गमें फैसला किया जाएगा। पंचायतों का जैसे ही पांच साल का कार्यकाल पूरा होगा, प्रधान, उपप्रधान, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद के सदस्य पदमुक्त हो जाएंगे। इसके बाद पंचायत में होने वाले सभी विकास कार्य, योजनाओं की स्वीकृति, भुगतान और प्रशासनिक फैसले प्रशासक लेंगेे। गौर हो कि प्रदेश की पंचायतों से पहले 47 शहरी निकायों में सरकार पहले ही प्रशासक लगा चुकी है।

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